हम सभी एक ऐसे समाज में रहते हैं जहाँ अपनी कमजोरियों को छिपाना हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। बचपन से ही हमें सिखाया जाता है कि भावनाएं दिखाना कमजोरी की निशानी है। रोना मत। डरना मत। खुद को इतना मजबूत दिखाओ कि कोई तुम्हें चोट न पहुँचा सके। लेकिन क्या इस "मजबूती" के मुखौटे ने हमें अंदर से खोखला नहीं कर दिया है? हम एक-दूसरे से जुड़ना चाहते हैं, प्रेम पाना चाहते हैं, लेकिन अपनी असली पहचान (authentic self) को दुनिया के सामने लाने से कतराते हैं। डॉ. ब्रेने ब्राउन (Dr. Brené Brown) अपनी युग-प्रवर्तक पुस्तक Daring Greatly में इसी विडंबना पर सीधा प्रहार करती हैं।
कल्पना कीजिए कि आपके पास एक ऐसा 'चीट कोड' हो, जो जीवन की हर जटिल समस्या, हर वित्तीय संकट और हर व्यक्तिगत संघर्ष को एक गणितीय समीकरण में बदल दे। एक ऐसा एल्गोरिदम जो आपकी भावनाओं को किनारे कर दे और आपको बिल्कुल सटीक, तार्किक और सफल निर्णय लेने की शक्ति दे। सुनने में किसी साइंस फिक्शन फिल्म का प्लॉट लगता है? लेकिन वॉल स्ट्रीट के दिग्गज और दुनिया के सबसे बड़े हेज फंड 'ब्रिजवाटर एसोसिएट्स' (Bridgewater Associates) के संस्थापक रे डालियो (Ray Dalio) के लिए, यह कोई फिक्शन नहीं, बल्कि उनका यथार्थ है।
हम सब सो रहे हैं। यह कोई काव्यात्मक अतिशयोक्ति नहीं है, बल्कि मानव जीवन की सबसे कड़वी और नंगी सच्चाई है। हम नींद में पैदा होते हैं, नींद में ही बड़े होते हैं, नींद में ही विवाह करते हैं, नींद में ही बच्चों को जन्म देते हैं, और अंततः बिना कभी यह जाने कि 'जागना' क्या होता है, नींद में ही मर जाते हैं। जब मैंने पहली बार एंथनी डी मेलो (Anthony de Mello) की কালजयी कृति Awareness पढ़ी, तो यह विचार किसी हथौड़े की तरह मेरे दिमाग पर लगा। यह कोई साधारण सेल्फ-हेल्प किताब नहीं है जो आपको "सफल" होने के 10 तरीके बताएगी। यह एक आध्यात्मिक सर्जिकल स्ट्राइक है, जो आपके उन सभी भ्रमों, मान्यताओं और कंडीशनिंग (Conditioning) को नष्ट कर देती है जिन्हें आप अब तक अपना 'स्वभाव' मानते आए थे।
हम सबने उस खाली पन्ने को घूरा है। वह कैनवास, वह गिटार जो कोने में धूल खा रहा है, या वह बिजनेस प्लान जो सालों से हमारे दिमाग में सिर्फ एक ख्याली पुलाव बनकर रह गया है। हम जानते हैं कि हमें क्या करना है। हमारे भीतर एक आग है, एक कॉलिंग है। फिर भी, हम उसे टाल देते हैं। हम अचानक महसूस करते हैं कि काम शुरू करने से पहले किचन की सफाई करना या सोशल मीडिया पर एक और घंटा बिताना बेहद जरूरी है। यह आलस नहीं है। यह कुछ और है। यह एक अदृश्य, शातिर और प्राणघातक दुश्मन है।
स्टीवन प्रेसफील्ड (Steven Pressfield) अपनी इस ऐतिहासिक और झकझोर देने वाली पुस्तक में इस दुश्मन को एक नाम देते हैं: Resistance (प्रतिरोध)।
कल्पना कीजिए: साल 1995 है। आपके पास दुनिया का सबसे बेहतरीन विश्वकोश (Encyclopedia) बनाने की चुनौती है। एक तरफ आपके पास माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) जैसी विशाल कंपनी है, जो भारी-भरकम बजट, दुनिया के सर्वश्रेष्ठ प्रबंधकों और शानदार वेतनभोगी लेखकों के साथ 'Encarta' (एनकार्टा) का निर्माण कर रही है। दूसरी तरफ, कुछ ऐसे लोग हैं जो बिना किसी पैसे के, अपने खाली समय में, केवल अपने शौक के लिए एक ऑनलाइन विश्वकोश लिख रहे हैं। अगर उस समय किसी अर्थशास्त्री से पूछा जाता कि कौन जीतेगा, तो उसका जवाब बिना सोचे 'माइक्रोसॉफ्ट' होता।
लेकिन हम जानते हैं कि इतिहास ने क्या करवट ली। 'विकिपीडिया' (Wikipedia) ने एनकार्टा को बाजार से पूरी तरह मिटा दिया।
हम हर दिन हजारों शब्द बोलते हैं, लेकिन क्या हम वास्तव में 'संवाद' कर रहे हैं? या हम केवल अपने शब्दों के पीछे छिपे हुए डर, असुरक्षा और आक्रोश को एक-दूसरे पर थोप रहे हैं? जब मैंने पहली बार संवाद और मानवीय मनोविज्ञान पर विचार करना शुरू किया, तो मुझे लगा कि भाषा केवल विचारों के आदान-प्रदान का एक माध्यम है। लेकिन मार्शल बी. रोसेनबर्ग (Marshall B. Rosenberg) ने मुझे झकझोर कर रख दिया। उनकी कालजयी कृति, Nonviolent Communication: A Language of Life (अहिंसक संवाद: जीवन की भाषा), केवल एक और 'सेल्फ-हेल्प' किताब नहीं है। यह भाषा के छद्म आवरण में छिपी एक आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक क्रांति है।